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Monday 8 September, 2008
 23:52 | 7/Feb/2008 |  14 Comment(s)
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Raas Geet - Parichay

रास गीत ( परिचय )
वृंदावन की पावन भू पर, किसने रति रूप निचोड़ा है |
द्वापर की संध्या वेला में, क्या रंग अनंग का घोरा है ||
त्रिभुवन की सारी सुंदरता, ब्रज कुंजन पे बलिहार हुई |
यमुना के पीन कगारों पे, नभ गंगा भी न्योछार हुई ||
चर अचर निशाचार देव सभी, वंशी की तान पे झूम रहे |
ब्रज बालाओं के रास रसे, ये कौन ? प्रेयसी ढूंढ रहे ||
छा रही अलौकिक मादकता, शर सुमन प्रणय का छोडा है |
वृषभानु सुता बरसाने की, गोकुल का नन्द का छोरा है ||


जय वासुदेव,गोविंद कृष्ण, घनश्याम मुरारी ब्रजनंदन |
मधुसूदन माखनचोर हरी, यशुदा के कन्हैया को वंदन ||
परिरंभ पाश में बंध बैठे, योगीश्वर जिसकी छबि निहार |
चरणामृत राधा रानी का , दो बूँद मिले सागर सिंगार ||
जयदेव तुम्हारी जय होवे, चैतन्य तुम्हे शत शत प्रणाम |
रसखान सूर की शरण पडूं, मीरा के चरणों में प्रणाम ||
सब दया करें, आशीष धरें , मैं " प्रेमगीत " दुहरा पाऊँ |
राधामाधव की मूर्ति वसे, उर में कवि भाव जगा पाऊँ ||


जय वासुदेव, गोविंद, कृष्ण, घनश्याम मुरारी ब्रजनंदन......
मधुसूदन, माखनचोर, हरी, यशुदा के दुलारे को वंदन... यशुदा के दुलारे को वंदन.....


यतेन्द्र कुमार पांडेय ( क्रमश:)


Category: Poetry | Permalink