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Raas Geet - Parichay
रास गीत ( परिचय ) वृंदावन की पावन भू पर, किसने रति रूप निचोड़ा है | द्वापर की संध्या वेला में, क्या रंग अनंग का घोरा है || त्रिभुवन की सारी सुंदरता, ब्रज कुंजन पे बलिहार हुई | यमुना के पीन कगारों पे, नभ गंगा भी न्योछार हुई || चर अचर निशाचार देव सभी, वंशी की तान पे झूम रहे | ब्रज बालाओं के रास रसे, ये कौन ? प्रेयसी ढूंढ रहे || छा रही अलौकिक मादकता, शर सुमन प्रणय का छोडा है | वृषभानु सुता बरसाने की, गोकुल का नन्द का छोरा है ||
जय वासुदेव,गोविंद कृष्ण, घनश्याम मुरारी ब्रजनंदन | मधुसूदन माखनचोर हरी, यशुदा के कन्हैया को वंदन || परिरंभ पाश में बंध बैठे, योगीश्वर जिसकी छबि निहार | चरणामृत राधा रानी का , दो बूँद मिले सागर सिंगार || जयदेव तुम्हारी जय होवे, चैतन्य तुम्हे शत शत प्रणाम | रसखान सूर की शरण पडूं, मीरा के चरणों में प्रणाम || सब दया करें, आशीष धरें , मैं " प्रेमगीत " दुहरा पाऊँ | राधामाधव की मूर्ति वसे, उर में कवि भाव जगा पाऊँ ||
जय वासुदेव, गोविंद, कृष्ण, घनश्याम मुरारी ब्रजनंदन...... मधुसूदन, माखनचोर, हरी, यशुदा के दुलारे को वंदन... यशुदा के दुलारे को वंदन.....
यतेन्द्र कुमार पांडेय ( क्रमश:)
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